पचगाहा

छउणावा पुछली
गागल फरे लदाभदी कि रसिया हेरिहेरि जाये ।
हम त पुछे ये गोरी गागल कैसे बिकाइ ।।

छउणीया जवाफ देली
लाखोन हिरा लाखोन मोती लाखे सम्पति बिकाइ ।
जकरासे दिलचित मिलतइ वसही गागल बिकाइ ।।

मतलब
गागल क फल नहिया बठिनिक छाति उठल देखके लोभेसे कतेक मोल परतउ कह के छौणावा पुछइकि माहा छौणीया जवाफ देली गागल फल नहिया उठल छाती देख के लोभाइ त बाणे, बकि जकरासे मन मिलतउ जउ ओसहिं गागल बिकेतउ ।





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