यहँवा कथि भेलइ कथि भेलइ

जतिया हमार अज्ञानी हैने, शिक्षाक कमिसे पछुवाइल जाइ ।
भेष हमार यसनक हैने, नकल दोसर जानाक कइलेसे भेलइ ।।

संस्कृति फेनी डउले हलइ, विदेशियानी नकल कइलेसे भेलइ ।
बोलिया हमार फेनी डउले हलइ, एबीसिडि पढलेसे बिगडलइ ।।

एक यापसमा मिलले हलहुँ, कुन दुष्टक नजर परलइ ।
भाइ भाइ लडाके यहँवा, देवी देवता कहँवा खेदलइ ।।

प्रजातन्त्र यलइ हसे गेलइ, हमरा सभक थाहे हैने ।
जे जे तन्त्र यावो जावो, धरम संस्कृति जामे भुलेलइ ।।

मेहनतक कमाइ जतुराजामा, मोदमासुमा खरच भेलइ ।
चकति हँसुली धोत फाँणक संस्कृति, नेकलेस मेकसी पाइन्टमा गेलइ ।।

हमरा थरुवह मस्त सुतले उहेसे
यहँवा कथि भेलइ कथि भेलइ ।

श्रीमति निलिमा महतो
पटिहानी– ०५, बरौजी, बेलोध, चितवन





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