Category Archives: Literature

यसने चलन यिहँवा

नाचेन जाने महतउँवा यगना टेढ यसने चलन यिहँवा । इनकाके दोष देके यपने बडके बनेके यसने चलन यिहँवा ।। ज्ञान सनेसक बात बटते संघलर्ष करते बुले खोजले यिहँवा । टङवा पकिडके पाछा वोरी तानके यसने चलन यिहँवा ।। सबवोर चारीवोर यापन मनसे, सुन्ते हखके चाहिं यिहँवा । खोखर बात करते यपने यागा जायके यसने चलन

तोर यादमा : थारु मुक्तक

तोर यादमा रि रोरक, ताल नाही हतउ । छोड्बही फेनी साथ मोर्, बेहाल नाही हतउ । जो, सक्बही त जो, बिसराके मोरके । तुई जाके मोर किहो, बाल नाही हताउ ।।

पेहनी चलावेके सिखहुँ

१. एक टाङ बकुली रिङइकी जाई, वोकर उगिलल सब कुनुह खाई । कथि ? २. शीत झवाझव निर्मल पानी, सय फुल गाथे कौने रानी । कथि ? ३. उतरेसे यावे मैना, एक टाङ दुई डइना । कथि ? ४. भितरा चिकट चाकट, बाहर कुइसा । तोइ न जाने मोइ, जाने तोर मौसा । कथि ?

यापन भाग्य रेखा

यापन भाग्य रेखा यपनहि लिखेके चाहिं । हमरा जामा कुनुह मिलके पहाड फोरके चाहिं ।। यापन हाथ उठाके दुखके छेकेके चाहिं । पाछाक दिव्य ज्योती यजुहिं लिखेके चाहिं ।। जसनुकु दुख हतइ फेनी डेरायेके नाहि । अन्याय करेके नाही अन्याय सहेके नाहि ।। विद्या जीवनज्योती सबको हखेके चाहिं । यापन भाग्य रेखा यपनहि लिखके चाहिं

सोहराइक गित

बानहुँ देवी रे सरस्वती बनो रे देवी लेले रामजी के नाउँ उता माई रे । पार्वती सरस्वती माई रे पुजवो गुरुजी के पाउ उता माई रे । कौने फुलवा पुजबो देवी रे सरस्वती पुजवो गुरुजी के पाउ उता माई रे । पार्वती रे सरस्वती माई उता माइ रे देउना फुलवा पुजबोरी देवी रे सरस्वती ।

याश लेसी रि दावो

कसनक अभागन करम भेलई री दावो सबदिन रोइके जीनगी बितइ री दावो । छुकनाक लिए कतेक ठोकर खेलही अभागन बेटि सुख हैने देवे सकलिय री दावो ।। ऋण लागो दिन झिन लागो री दावो व्यर्थे चितवा झिन दुखोसी री दावो । संघर्ष करते बुलइकि छुकना तोर हमरो दिन फिरतई याश लेसी रि दावो ।। याश

चेली बेटीक काथा

बेचाइ बडउ हमार चेलीबेटी विदेशवाक गउँवामा उदास भेलउ हमार गउँवा यापन मनसेक नउँवामा । लुटेलउ हमार इज्जत चोखियबहि नामि भागके लाजे मरलसु यापन मुहवा एइनवामा हेरके । दुख कष्ट सहे परइ यापन खुसिया त्यागके सुख कहँवा पवेतउ यापन घरवा छाडके । दिन रातक पत्ते हइनो गाह्र भेलउ चिन्हेके कुन सकबह मोर काथा एकबेरी सुनके भुलाएके